112 फीट ऊंचे आदियोगी के बारे में 12 बातें जो शायद आप नहीं जानते

यहाँ हम आपको 112 फीट के आदियोगी के बारे में कुछ बातें बता रहे हैं जो आप को जाननी चाहियें।

1. गिनीज़ विश्व रिकॉर्ड

112 फीट ऊंचे आदियोगी को विश्व रेकॉर्ड्स की गिनीज़ बुक ने ‘सबसे ऊंची आवक्ष मूर्ति'(अर्ध प्रतिमा) के रूप में मान्यता दी है। आदियोगी की ये प्रतिष्ठित मूर्ति जमीन से 150 फ़ीट ऊंचाई तक की है, 25 फ़ीट चौड़ी है और ये 500 टन स्टील से बनी है।

2. आदियोगी दिव्यदर्शनम

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रात में आदियोगी को आकाश में एक अत्यंत भव्य 3-डी लेज़र शो के माध्यम से प्रकाशित किया जाता है जिसमें यह बताया जाता है कि कैसे आदियोगी ने समस्त मानवता को यौगिक विज्ञान अर्पण किया! यह शो सप्ताहांत में तथा पूर्णिमा, अमावस्या एवं अन्य शुभ दिनों में रात को 8 बजे से 8.15 तक होता है।

3. आदियोगी को वस्त्र अर्पण

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आदियोगी के चारों ओर लगे हुए 621 त्रिशूलों में से किसी पर भी एक काला कपड़ा बांध कर भक्त गण आदियोगी को वस्त्र अर्पण कर सकते हैं।

4. आदियोगी प्रदक्षिणा

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आदियोगी और ध्यानलिंग के चारों ओर की जाने वाली यह एक 2 किमी लंबी परिक्रमा है। आदियोगी की कृपा के प्रति जो ग्रहणशील होना चाहते हैं, उनके लिये सदगुरु ने यह व्यवस्था की है जिससे अंतिम मुक्ति की ओर किये जाने वाले प्रयास को बल मिल सके। एक खास मुद्रा धारण कर के तथा एक खास मंत्र का जप करते हुए की जाने वाली यह परिक्रमा एक ऐसा तरीका है जिससे ईशा योग सेंटर के प्राणप्रतिष्ठित स्थानों की ऊर्जा को ग्रहण किया जा सकता है।

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5. योगेश्वर लिंग के लिये अर्पण

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योगेश्वर लिंग की ऊर्जाओं के प्रति ग्रहणशील होने के लिये भक्तगण लिंग को जल एवं नीम की पत्तियाँ अर्पित कर सकते हैं।

6. पूर्णिमा संगीत समारोह

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हर पूर्णिमा की रात्रि को आदियोगी क्षेत्र मध्यरात्रि तक खुला रहता है तथा साउंड्स ऑफ ईशा द्वारा रात्रि 10.30 से 11.30 तक एक संगीत कार्यक्रम आदियोगी को समर्पित किया जाता है।

7. अमावस्या

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हर अमावस्या के दिन, आसपास के गाँवों से आने वाले लोग योगेश्वर लिंग को पारंपरिक वस्तुएं अर्पित करते हैं। पारंपरिक संगीत एवं नृत्य भी अर्पित किया जाता है, जिसके बाद प्रसाद वितरण किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि यह सम्पूर्ण परिवार के लिये बहुत ही अच्छा है।

8. सदगुरु की संकल्पना

आज जिस तरह आदियोगी का चेहरा हमें दिखता है, वैसा बनाने के लिये ढाई साल से भी ज्यादा समय लगा था और दर्जनों डिज़ाइने बनीं थीं। सदगुरु के मन में एक संकल्पना थी कि आदियोगी का चेहरा किस तरह से प्रस्तुत होना चाहिये और वे किसी भी प्रकार से, उससे कुछ भी कम होने देने के लिये तैयार नहीं थे। तभी ये जबर्दस्त परिणाम हमें मिला है।

9. आदियोगी की मूल्यवान वस्तुएँ

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योगेश्वर लिंग के चारों ओर, पीतल की फर्श टाइल्स लगी हैं। इनमें छोटी छोटी नक्काशियाँ की हुईं हैं जो बहुत ही बारीकी से की हुईं कलाकृतियाँ हैं। ये आदियोगी की कुछ मूल्यवान वस्तुओं को दर्शाती हैं, जिनका वर्णन यौगिक परंपराओं में मिलता है। ये हैं, कान के कुंडल, उनकी जटाओं में मढ़ा हुआ महीन अर्धचंद्र, एक रुद्राक्ष मनका, एक नीम पत्ती, एक डमरू, धनुष, कुल्हाड़ी एवं एक घंटी।

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10. बहुभाषी लिंग

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अगर आप योगेश्वर लिंग को ध्यान से देखें तो आप को उस पर, ‘शंभो’ मंत्र, चार दक्षिण भारतीय भाषाओं – तमिल, तेलुगु, कन्नड़ एवं मलयालम – में लिखा हुआ मिलेगा।

11. सप्त ऋषियों की मूर्तियाँ

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योगेश्वर लिंग मंडप का एक महत्वपूर्ण भाग है एक काले पत्थर का फलक जिस पर सप्त ऋषियों को दर्शाया गया है। सदगुरु ने मूर्तियों के इस फलक का प्राणप्रतिष्ठापन किया है। इस पवित्र फलक को कोई हाथ से नहीं छूता, उसकी सफाई करने वाले भी नहीं।

12. रुद्राक्ष मनकों का अर्पण

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आदियोगी के गले में जो रुद्राक्ष माला है, संभवतः वह विश्व में सबसे बड़ी माला है। इसमें 1,00,008 मनके होते हैं। ये मनके 12 महीनों तक दिव्य ऊर्जा को ग्रहण करते हैं और प्रत्येक महाशिवरात्रि में उस शुभ रात्रि के अवसर पर आने वाले भक्तों को ये प्रसाद रुप में दिये जाते हैं।

महाशिवरात्रि का उत्सव सदगुरु द्वारा अर्पित एक अत्यंत दुर्लभ विशेषाधिकार है, जो खुशहाली की संभावनायें एवं ऊर्जा प्राप्ति का मार्ग खोल देता है। महाशिवरात्रि एक विशेष संभावना प्रस्तुत करती है जिसमें प्रकृति की शक्ति का उपयोग हमारी आध्यात्मिक प्रगति एवं खुशहाली के लिये होता है। ईशा योग सेंटर में आदियोगी की उपस्थिति में यह सारी रात चलने वाला, विपुलता से भरपूर उत्सव एक तीव्र आध्यात्मिक अनुभव को खोलने के लिये उपयुक्त माहौल बनाता है।

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