लाइफ पार्टनर नहीं करता है आपके इमोशन की कद्र, इस तरह डील करें भावनात्मक अनदेखी

चुप होकर बैठ जाने या इंतजार करने से बेहतर है कि आप अपनी तरफ से कुछ सकारात्‍मक प्रयास करें. मसलन, कई बार पार्टनर को पता भी नहीं होता कि उसने गलती क्‍या की है या उसके किस बिहेव की वजह से सारी समस्‍याएं शुरू हुईं. ऐसे में आप उनसे अकेले में बात करें और अपनी भावनाओं को व्‍यक्‍त करें.

शादीशुदा खुशहाल जिंदगी में उतार चढ़ाव आते ही रहते हैं. ऐसे समय में हम केवल इंतजार कर सकते हैं कि कब यह तूफान टले और सब कुछ नॉर्मल हो जाए. लेकिन अगर ये तूफान कई दिनों या महीनों तक बना रहे तो समझ लीजिए कि आगे कुछ और बड़ी मुसीबत आने वाली है. ऐसा ही एक तूफान है इमोशनल नेगलेक्‍टेंस यानी अपने पार्टनर की भावनाओं की कद्र ना करना. ब्राइड्स में छपे एक आलेख में फैमिली थेरेपिस्‍ट सारा ओलेरी (Sarah O’Leary) का कहना है कि इमोशनल नेगलेक्‍ट आश्‍चर्यजनक रूप से कपल्‍स को एक दूसरे से दूर कर देती है और रिश्‍ते में भावनात्‍मक रूप से असुरक्षा की भावना जन्‍म लेने लगती है. ऐसा करने से दोनों ही मानसिक और शारीरिक तौर पर बिखरने लगते हैं.

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इमोशनल नेगलेक्‍ट के लक्षण

  • रिलेशनशिप में अकेलापन लगता है.
  • पार्टनर से दूर समय बिताना चाहते हैं.
  • जब पार्टनर से बात करने की कोशिश करने पर वह चुप हो जाता है.
  • सोशल गैदरिंग में आप पार्टनर के बिना अटेंड करते हैं.
  • आप अपने पार्टनर से अधिक दोस्‍तों की जरूरत महसूस करते हैं.
  • आप अपनी भावनाओं को इग्‍नोर करने लगते हैं.
  • अपने परिवार और दोस्‍तों के बीच असहज मससूस करते हैं.
  • लॉग टर्म डिसीजन लेने से बचते फिरते हैं.
  • एक दूसरे के करीब नहीं जाते.
  • अपने पार्टनर पर भरोसा नहीं करते.

इमोशनल नेगलेक्‍ट से कैसे बचें

ब्‍लेम गेम से बचें

आप एक दूसरे पर आरोप लगाने की बजाए बेहतर होगा कि अपनी अभी की भावनाओं को आपस में साझा करें. यह बताएं कि आप इग्‍नोर किए जाने की वजह से परेशान हैं और आप उनसे बात करना चाहते हैं. अगर आप आरोप या कमियां ही निकालेंगे तो बात बनने की बजाय बिगड़ती जाएगी.

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आत्‍ममंथन जरूरी

किसी भी प्रॉब्‍लम को सॉल्‍व करने के लिए जिस तरह हम सोचते और विचारते हैं उसी तरह रिलेशनशिप की समस्‍याओं को ठीक करने के लिए भी आत्‍ममंथन जरूरी है. आप यह सोचें कि आखिर ये समस्‍या शुरू क्‍यों हुई या कही आपकी ही किसी गलतियों की वजह से बात नहीं बिगड़ गई.

प्रयास करें

चुप होकर बैठ जाने या इंतजार करने से बेहतर है कि आप अपनी तरफ से कुछ सकारात्‍मक प्रयास करें. मसलन, कई बार पार्टनर को पता भी नहीं होता कि उसने गलती क्‍या की है या उसके किस बिहेव की वजह से सारी समस्‍याएं शुरू हुईं. ऐसे में आप उनसे अकेले में बात करें और अपनी भावनाओं को व्‍यक्‍त करें.

क्‍वालिटी टाइम जरूरी

कई बार रोज के तनाव, समस्‍याओं, रिस्‍पॉन्सिबिलिटीज आदि की वजह से कई बार रिश्‍तों की दूरियों को समेटना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में शोर शराबे और घर परिवार से दूर एक दूसरे के लिए क्‍वालिटी समय निकालें और उनकी बात को सुनें.

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